गायिका गौहर जान

 

गायिका गौहर जान, भारतीय संगीत इतिहास की मशहूर महिलाओं में से एक थीं। उन्होंने अपनी सुंदर आवाज़ और उच्चतम रचनात्मक गुणों के लिए बहुत प्रसिद्धता प्राप्त की थी। गौहर जान एक मुस्लिम थीं, लेकिन उन्होंने हिन्दुस्तानी और दक्षिण भारतीय संगीत में अपनी पहचान बनाई।

गायिका गौहर जान का जन्म जन्म 26 जून, 1873 को उत्तर प्रदश के आजमगढ़ जिले में हुआ था. जन्म से वो क्रिश्चियन थीं,  उनका असली नाम एंजेलीना योवर्ड था. गौहर जान असल में आर्मेनिया मूल की थीं. उनकी मां विक्टोरिया हेम्मिंग्स का जन्म भारत में ही हुआ था. वो कुशल सिंगर और डांसर थीं. गौहर जान को म्यूजिक और डासिंग का हुनर अपनी मां से ही विरासत में मिला था. उनके पिता ने उन्हें संगीत की शिक्षा दी थी, और उन्होंने बचपन से ही संगीत में रुचि दिखाई थी। गौहर जान की शानदार आवाज़ और उनकी अद्वितीय ताल में बाजी के कारण वे बहुत छोटी उम्र में ही प्रमुख गायिका बन गईं।

गौहर जान को गवाही मिली है कि उन्होंने जब पहली बार अपनी आवाज़ से एक शो दिया था, तो लोग चौंक गए थे। वे एक नई प्रकार के गायन का प्रतिनिधित्व करती थीं जो भारतीय संगीत की परंपरा के बाहर था। उनका शैली मिश्रित था और उन्होंने उच्च नोटों को प्राकृतिकता से गाने का ढंग विकसित किया था।

गौहर के दादा ब्रिटिश थे जबकि दादी हिंदू थीं. उनके पिता का नाम विलियम योवर्ड. लेकिन उनके माता पिता का 1879 में तलाक हो गया था, तब वो मात्र 6 वर्ष की थीं. पति से तलाक के बाद, गौहर की मां ‘खुर्शीद’ नाम के एक आदमी के साथ बनारस चली आईं. बनारस में मां और बेटी ने इस्लाम धर्म अपना लिया. ‘विक्टोरिया’ ने अपना नाम ‘मलका जान’ रखा तो ‘एंजेलीना’ का नाम भी बदलकर ‘गौहर जान’ कर दिया गया. कुछ ही दिनों में ‘मलका जान’ बनारस की मशहूर हुनरमंद गायिका और कत्थक डांसर के तौर पर पहचानी जाने लगीं. कुछ ही वक्त बाद मलका जान अपनी बेटी के साथ कलकत्ता चली गईं और नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में परफॉर्म करना शुरू कर दिया.

गौहर जान के लिए इतनी प्रसिद्धता और मान्यता हासिल करना आसान नहीं था, क्योंकि उनका समय उनके लिए औरत होने के कारण थोड़ा कठिन था। उन्होंने इस तकनीकी और आदान-प्रदान से ऊपर उठकर अपनी क्षमताओं को साबित किया और लोगों को अपनी शानदार आवाज़ से प्रभावित किया।

गौहर जान ने अपनी करियर में कई अद्वितीय उपलब्धियाँ हासिल कीं। उन्होंने रेकॉर्डिंग के लिए भारतीय संगीत की पहली महिला थीं और 1902 में उन्होंने अपनी पहली रेकॉर्ड बनाई। इसके बाद उन्होंने कई अन्य रेकॉर्डिंगें भी कीं, जो बहुत प्रशंसा प्राप्त करने के बाद भी आज तक उपलब्ध हैं।

उन्होंने अपनी प्रसिद्धि के साथ-साथ विदेशों में भी प्रशंसा कमाई, और वे एक प्रमुख गायिका के रूप में अंग्रेज़ी सम्राट और भारतीय संगीत के प्रतिष्ठित नामों के साथ काम करने का शानदार सौभाग्य प्राप्त कर सकीं।

हालांकि, उनके बाद के वर्षों में उनकी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनकी करियर में थोड़ी थमावट आई, लेकिन उन्होंने फिर भी गायन के क्षेत्र में अपना योगदान दिया। उन्होंने अपने गानों के माध्यम से भारतीय संगीत को एक नया माध्यम दिया और संगीत प्रेमियों के दिलों में स्थान बनाया।

गौहर जान का अंतिम समय 17 जनवरी, 1930 को उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने भारतीय संगीत की विरासत में अपनी महत्त्वपूर्ण जगह बनाई है, और उनके योगदान को आज भी स्मरण किया जाता है। उनकी प्रस्तुतियों का प्रभाव और आवाज़ आज भी संगीत प्रेमियों को प्रभावित करता है और गौहर जान को संगीत की इतिहास में एक महान गायिका के रूप में स्थान मिला है।

गौहर जान की मशहूरी बड़ी तेजी से फैली और उन्होंने अपने शोकेस्त्र करियर के दौरान भारत और विदेशों में कई अदाकारों के साथ काम किया। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, बंगाली, पंजाबी, फारसी, गुजराती और आदिवासी भाषाओं में गीत गाए और लोगों को मनोहारित किया। गौहर जान ने कई संगीत दरबारों और महाराजों के आदर्श गायिका के रूप में अपनी पहचान बनाई।

गौहर जान सबसे महंगी सिंगर थीं. ऐसा कहा जाता है कि वो सोने की एक सौ एक गिन्नियां लेने के बाद ही किसी महफिल में जाती थीं और वहां गाती थीं. शुरुआती दिनों में गौहर बेहद अमीर महिला थीं. उनके पहनावे और जेवरात उस वक्त की रानियों तक को मात देते थे.

 

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