वाराणसी यात्रा: एक आत्मा की अद्वितीय अनुभवना

नमस्कार पाठकों,

वाराणसी का इतिहास

वाराणसी, भारतीय उपमहाद्वीप के मध्य-पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख पुरातत्विक और धार्मिक स्थल है। यह संस्कृति, धर्म, शिक्षा, कला और विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वाराणसी का नाम प्राचीन ग्रंथों में ‘काशी’ भी कहलाता है।

प्राचीनकाल: वाराणसी का ऐतिहासिक संकेत प्राचीन वेदों में पाया जाता है। इसे सरस्वती नदी के किनारे स्थित महत्वपूर्ण नगरों में से एक माना जाता था। वाणी नदी के किनारे स्थित इस स्थल का महत्व वेदों में उल्लिखित है। महर्षि विश्वामित्र और महर्षि गौतम के आश्रम इस क्षेत्र में स्थित थे।

बौद्ध और जैन धर्म: वाराणसी बौद्ध और जैन धर्म के प्रमुख केंद्रों में से एक भी रहा है। गौतम बुद्ध ने यहाँ धर्म प्रसार किया था और पहले पांच भिक्षु यहाँ बोधि प्राप्त की थी। जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ भी वाराणसी में आए थे और उनके आश्रम के आस-पास उनके शिष्यों ने तीर्थंकर की पूजा की थी।

हिन्दू धर्म: वाराणसी हिन्दू धर्म के एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर, जहाँ भगवान शिव को विश्वनाथ या काशीनाथ के रूप में पूजा जाता है, यहाँ की मुख्य आकर्षण है। गंगा घाटों पर हिन्दू धार्मिक और पूजा क्रियाएँ आयोजित होती हैं और लाखों श्रद्धालु यहाँ स्नान करते हैं।

सुलतानी और मुघल शासन: वाराणसी का ऐतिहासिक माध्यकाल में सुलतानों और मुघल शासकों के अधीन आना हुआ। इस काल में मंदिरों और आश्रमों पर आक्रमण किए गए और कई स्थलों पर मस्जिदें निर्मित की गई।

ब्रिटिश शासन: वाराणसी ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहा। 1905 में स्वामी श्रद्धानंद ने यहाँ ‘निहंग उद्घाटन’ आयोजित किया और वाराणसी नगर महापालिका की स्थापना भी ब्रिटिश काल में हुई।

स्वतंत्रता संग्राम: वाराणसी ने स्वतंत्रता संग्राम में भी अहम भूमिका निभाई। गांधीजी के आवास भी यहाँ थे और उन्होंने यहाँ से अनेक सत्याग्रह आयोजित किए।

वर्तमान समय: वाराणसी आज भी भारतीय संस्कृति, धर्म और शिक्षा के केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण है। यहाँ के मंदिर, घाट, शिक्षा संस्थान और कला-संस्थान इसकी धरोहर हैं और यह आज भी दुनियाभर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इस प्रकार, वाराणसी का ऐतिहासिक यात्रा संस्कृति, धर्म और सांस्कृतिक धरोहर की दिशा में विशाल और महत्वपूर्ण रहा है।

भारतीय सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र वाराणसी, उत्तर प्रदेश के गहरे सांस्कृतिक रूपक बजार में से एक है। यह स्थल हिन्दू धर्म का प्रमुख धार्मिक और तात्कालिक उपनगर है, जो समृद्धि, ध्यान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। वाराणसी की यात्रा एक अनूठी अनुभवना होती है, जिसमें आपको भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का संवाद होता है।

1. काशी विश्वनाथ मंदिर: यहां पर स्थित विश्वनाथ मंदिर हिन्दू धर्म के एक प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है। मंदिर के शिखर से निकलने वाली आरती की रौशनी देखकर आत्मा को शांति की अनूठी अनुभूति होती है।

2. असी घाट: गंगा घाटों का वाराणसी में अद्वितीय महत्व है। असी घाट पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आयोजित होने वाली गंगा आरती एक अद्वितीय दृश्य होती है।

3. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय: वाराणसी के प्रमुख शिक्षा संस्थान में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का भी विशेष महत्व है। यहां के विद्यार्थी और शिक्षक भारतीय संस्कृति को अध्ययन करते हैं और उसके महत्व को समझते हैं।

4. सारनाथ: वाराणसी से कुछ किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ गौतम बुद्ध के पहले उपदेश के स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है। यहां के सांची स्तूप और सारनाथ म्यूजियम आपको बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी प्रदान करते हैं।

5. कुलिना भोजन: वाराणसी यात्रा आपके लिए स्वादिष्ट और परंपरागत भोजन की भी एक अद्वितीय अनुभवना होती है। मलाईगुलाब और बेनारसी पान की मिठास स्वादिष्टता में एक विशेषता है।

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01.नया विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी

New Vishwanath Temple | Places to visit in Varanasi

नया विश्वनाथ मंदिर | वाराणसी में घूमने के लिए05 सर्वोत्तम स्थानों में से #1

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंदर स्थित इस मंदिर के दरवाजे पर रोजाना पर्यटकों का तांता लगा रहता है। बिड़ला परिवार जो भारत में उद्यमियों का एक बेहद सफल समूह रहा है, ने इसके निर्माण का काम शुरू किया, जिससे स्थानीय लोग इसे बिड़ला मंदिर कहने लगे। मंदिर के बारे में एक बड़ी बात यह है कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि वास्तव में सात अलग-अलग मंदिर हैं जो मिलकर एक बड़ा धार्मिक परिसर बनाते हैं। पौराणिक पुराना विश्वनाथ मंदिर इस मंदिर के डिजाइन के लिए प्रत्यक्ष प्रेरणा है। इसकी हर दीवार भगवान कृष्ण के उन कथनों से भरी हुई है, जब उन्होंने भगवद गीता का पाठ किया था। वाराणसी के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक, यात्रा के दौरान इसे अवश्य देखना चाहिए!

समय: सुबह 2:30 बजे से रात 11:00 बजे तक
मंदिर अनुसूची:
मंगल आरती: रात्रि 2:30 बजे
भोग आरती: सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
सप्त ऋषि आरती: शाम 7:00 बजे से रात 8:00 बजे तक (दर्शन की अनुमति नहीं)
श्रृंगार/भोग आरती: रात्रि 9:00 बजे (केवल बाहरी दर्शन की अनुमति)
शयन आरती: रात्रि 10:30 बजे

02.काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी

Kashi Vishwanath Temple | Places to visit in Varanasi

काशी विश्वनाथ मंदिर | वाराणसी में घूमने के लिए 05 सर्वोत्तम स्थानों में से #2

बहुत से लोग इसे वाराणसी में घूमने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मंदिर के रूप में देखते हैं, और कुछ इसे पूरे देश में सबसे महत्वपूर्ण मंदिर मानते हैं। इसकी कहानी तीन हजार पांच सौ साल से भी अधिक पुरानी है, जो कि एक आश्चर्यजनक समय है। इसके अंदर और इसके आस-पास इतना कुछ घटित हुआ है कि इसे देखने पर अभिभूत हुए बिना रहना मुश्किल है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो कि शिवलिंग हैं जो भगवान शिव के भौतिक प्रतीक हैं। मंदिर के शिखर और गुंबद पूरी तरह से सोने से ढंके हुए हैं। पंजाब के तत्कालीन शासक, महाराजा रणजीत सिंह इसके लिए जिम्मेदार थे, क्योंकि मंदिर के गुंबदों को सोने से ढंकना एक पंजाबी परंपरा है, जैसा कि स्वर्ण मंदिर में दिखाया गया है। कई भक्तों का मानना ​​है कि शिवलिंग की एक झलक आपकी आत्मा को शुद्ध कर देती है और जीवन को ज्ञान के मार्ग पर ले जाती है।

समय: सुबह 2:30 बजे से रात 11:00 बजे तक
मंदिर अनुसूची:
मंगल आरती: रात्रि 2:30 बजे
भोग आरती: सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
सप्त ऋषि आरती: शाम 7:00 बजे से रात 8:00 बजे तक (दर्शन की अनुमति नहीं)
श्रृंगार/भोग आरती: रात्रि 9:00 बजे (केवल बाहरी दर्शन की अनुमति)
शयन आरती: रात्रि 10:30 बजे

03.दुर्गा मंदिर, वाराणसी

Durga Temple | Places to visit in Varanasi

दुर्गा मंदिर | वाराणसी में घूमने के लिए 05 सर्वोत्तम स्थानों में से #3

देवी दुर्गा को समर्पित यह मंदिर स्त्रीत्व की दिव्यता का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में मौजूद देवता हवा से प्रकट हुए थे और इन्हें किसी मनुष्य ने नहीं बनाया था। इस मंदिर के लिए नारीवाद का एक और प्रतीक यह है कि इसका निर्माण वास्तव में एक महिला द्वारा करवाया गया था। इसके निर्माण की ज़िम्मेदारी बंगाल की महारानी की थी और उनकी इच्छा के अनुसार ही इसका निर्माण वास्तुकला की नागर शैली में किया गया था। लेकिन, इस मंदिर के बारे में सबसे दिलचस्प तथ्य शायद यह है कि यहां हर दिन कई बंदर आते हैं। दरअसल, यहां इतने सारे बंदर हैं कि इसे अक्सर ‘बंदर मंदिर’ भी कहा जाता है। इसलिए, यहां आने पर उन शरारती वानरों से सावधान रहें!

  • समय: 5:00 AM- 9:00 PM

04.दशाश्वमेध घाट , वाराणसी

Dashashwamedh Ghat | Places to visit in Varanasi

दशाश्वमेध घाट | #वाराणसी में घूमने के लिए 05 सर्वोत्तम स्थानों में से 4

यह विशेष घाट शहर का सबसे पुराना घाट माना जाता है, और इसलिए इसे विशेष माना जाता है। यदि आपने गंगा में स्नान करते और नदी के किनारे हाथ में दीये लेकर प्रार्थना करते लोगों के वीडियो फुटेज देखे हैं, तो संभावना है कि आपने यही घाट देखा होगा। यह अक्सर लोगों की भीड़ के कारण गुलजार रहता है जो अपने पापों को धोने और प्रार्थना करने के लिए यहां आते हैं। तपस्वी, हिंदू श्रद्धालु और पर्यटक सभी दैनिक आधार पर दशाश्वमेध घाट पर गंगा तट पर उतरते हैं। इतना महत्वपूर्ण स्थल और प्रसिद्ध गंगा आरती का मेजबान होने के नाते, वाराणसी की किसी भी यात्रा पर इसे अवश्य देखना चाहिए!

  • आरती का समय: 7:00 PM to 7:45 PM (summers); 6:00 PM to 6:45 PM (winters)

05.अस्सी घाट, वाराणसी

Assi Ghat | Places to Visit in Varanasi

अस्सी घाट | वाराणसी में घूमने के लिए 05 सर्वोत्तम स्थानों में से #5

ऐसा माना जाता है कि अस्सी घाट ही वह स्थान है जहां महान कवि तुलसीदास का निधन हुआ था। क्षेत्र का सबसे दक्षिणी घाट, यह पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय है। औसतन एक दिन में प्रति घंटे लगभग 300 लोग इसे देखने आते हैं, लेकिन त्योहार के दिनों में यह संख्या 2500 लोगों तक हो सकती है। यहां आने पर, आप नदी पर इत्मीनान से नाव की सवारी या गर्म हवा के गुब्बारे की सैर पर जा सकते हैं! भक्त अनुष्ठान करने से पहले यहां स्नान करते हैं क्योंकि कहा जाता है कि नदी का पानी उनकी आत्मा को शुद्ध करता है, और उन्हें कार्य के लिए तैयार करता है।

समय: पूरे दिन खुला रहता है

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