मदर टेरेसा: दया और सेवा की प्रेरणा

आज हम सभी मिलकर एक खास और महत्वपूर्ण दिन के उपलक्ष्य में इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से मदर टेरेसा की जन्म जयंती मना रहे हैं। मदर टेरेसा, जिन्हें हम प्यार से “माता” भी कहते हैं, एक महान होने के साथ-साथ एक दयालु और मानवता की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाली थीं। उनकी जन्म जयंती को मनाकर हम उनके अद्भुत कार्यों की यादें ताजगी से याद करते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं।

विश्वास की मजबूती: मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को अल्बेनिया के श्कोदर (Skopje) में हुआ था। वे एक शक्तिशाली विश्वास परिपूर्ण परिवार से आई थीं और उनका विश्वास उनके जीवन के आधारभूत हिस्से में था। मदर टेरेसा के विश्वास में केवल एक ईश्वर ही नहीं था, बल्कि वे हर मानवता में भगवान का रूप देखती थीं। उनका मानना था कि सेवा का काम ही सच्चे धर्म का हिस्सा है।

दया और सेवा की मिसाल: मदर टेरेसा का यह मानना था कि हमें जिस व्यक्ति की मदद करने का अवसर मिलता है, उसे हमें देखकर हमें खुदा की तस्वीर नजर आती है। उन्होंने कोलकाता में “निश्चय” नामक एक संगठन स्थापित किया, जिसका उद्देश्य गरीब, बेघर और बिमार लोगों की मदद करना था। उन्होंने अपने जीवन के समय में असंख्य लोगों की मदद की, जो समाज में छोटे-मोटे कामों से जुड़े थे। उनकी महानता यहाँ इसमें थी कि उन्होंने छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान निकालने में भी अपना जीवन समर्पित किया।

प्रेरणा का स्रोत: मदर टेरेसा के द्वारा की गई सेवा का आदर्श हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनकी अद्वितीय दया, समर्पण और सेवा भावना हमें यह सिखाती है कि हमें अपने स्वार्थ को छोड़कर दूसरों की मदद करने में अपना समय और शक्ति लगानी चाहिए। उनकी उदाहरण से हमें यह सिख मिलता है कि सच्ची सेवा और मानवता की सेवा हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

दुनियाभर में उनकी महिमा: मदर टेरेसा की सेवा का परिणाम यह था कि उन्होंने असंख्य लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन किया। उन्होंने गरीबों, बेहदगरों और बिमार लोगों के जीवन में नई रोशनी डाली। उनके संघटन “निश्चय” द्वारा चलाए गए अस्पताल, आश्रयालय और शिक्षा संस्थान आज भी उनके प्रेरणास्त्रोत हैं और लाखों लोगों को राह दिखाते हैं।

सद्गुरु की अपनी बातें: मदर टेरेसा के जीवन से हमें कई महत्वपूर्ण सिख मिलती हैं। उनके अपने विचार और उक्तियाँ हमें एक नया दृष्टिकोण देते हैं। उन्होंने कहा था, “हमें छोटी बातों में खुदा की अद्भुतता को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए।” उनके इस विचार से हमें यह सिख मिलती है कि हमें हर परिस्थिति में ईश्वर की मौजूदगी को महसूस करना चाहिए।

निष्कलंक सेविका: मदर टेरेसा को “निष्कलंक सेविका” के रूप में सम्मानित किया गया था। उनकी सेवा का यह आदर्श हमें यह बताता है कि हमें अपने काम को ईमानदारी से और उत्साह से करना चाहिए, चाहे वो काम छोटा हो या बड़ा।

समापन: मदर टेरेसा की जन्म जयंती के इस खास मौके पर, हमें उनके अद्भुत जीवन और सेवा भावना से प्रेरित होकर, अपने जीवन को सर्वोत्तम तरीके से जीने का संकल्प लेना चाहिए। उनकी दया, समर्पण और सेवा की भावना को अपनाकर, हम सभी मिलकर एक मानवता की भावना को मजबूती दे सकते हैं और उनके योगदान को याद करके उनके उपकारों का पुनरावलोकन कर सकते हैं। आइए, उनके उपकारों को याद करके उनकी प्रेरणा में चलते हैं और एक बेहतर और दयालु समाज की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।

मदर टेरेसा के जन्म दिन पर उनके बोले हुए दिल छू जाने वाली बात

"हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते, लेकिन हम छोटे-छोटे कार्य बड़े प्रेम से कर सकते हैं।" - मदर टेरेसा

"आप जहां भी जाएं प्यार फैलाएं। कोई भी आपके पास आए बिना खुश हुए न जाए।"- मदर टेरेसा

"यदि आप लोगों का मूल्यांकन करते हैं, तो आपके पास उनसे प्यार करने का समय नहीं है।"- मदर टेरेसा

"मैं अकेले दुनिया को नहीं बदल सकता, लेकिन मैं पानी में एक पत्थर फेंककर कई लहरें पैदा कर सकता हूं।" - मदर टेरेसा

"दयालु शब्द छोटे और बोलने में आसान हो सकते हैं, लेकिन उनकी गूँज वास्तव में अंतहीन होती है।" - मदर टेरेसा

"प्यार की भूख को मिटाना रोटी की भूख से कहीं अधिक कठिन है।" - मदर टेरेसा

"शांति की शुरूआत मुस्कान से होती है।" - मदर टेरेसा

"नेताओं की प्रतीक्षा मत करो; इसे अकेले करो, व्यक्ति दर व्यक्ति।" - मदर टेरेसा

"खुशी प्यार का जाल है जिसके द्वारा आप आत्माओं को पकड़ सकते हैं।" - मदर टेरेसा

"हम खुद महसूस करते हैं कि हम जो कर रहे हैं वह सागर में एक बूंद मात्र है। 
लेकिन उस बूंद के गायब होने से सागर छोटा हो जाएगा।" - मदर टेरेसा

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