दिल्ली में बारिश बनी एक समस्या

दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है, जिसके कारण नदी के किनारे वाले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है. बाढ़ के कारण दिल्ली के कश्मीरी गेट का यमुना बाजार पानी से डूब गया है. एनडीआरएफ  की टीम बचाव कार्य में जुड़ी हुई है और लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है. यमुना के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को निकालने और उन्हें सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है. राजघाट डीटीसी डिपो के पास राहत केंद्र में फिलहाल 126 लोग हैं और व्यापक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं.

दिल्ली में यमुना का खतरनाक जलस्तर  : दिल्ली की यमुना नदी, इस वक्त दिल्ली वासियों के लिए खतरा बनी हुई है. दिल्ली में यमुना का खतरनाक जलस्तर 205.33 मीटर है, जो अब 208.46 मीटर तक पहुंच चुका है

दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने गृहमंत्री श्री अमित शाह को लिखी चिट्ठी : दिल्ली में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए सीएम केजरीवाल ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने शाह से अनुरोध किया था कि संभव हो तो हरियाणा में हथिनी कुंड बैराज से यमुना के लिए पानी सीमित स्तर पर छोड़ा जाए.

केंद्रीय मंत्री का जवाब : बैराज में पानी स्टोर नहीं हो सकता

केंद्रीय मंत्री ने इस बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीति नहीं करने की सलाह भी दी है. उन्होंने कहा, “केजरीवास को बाढ़ जैसे मामलों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. वे आईआईटी से पासआउट हैं. उन्हें पता होना चाहिए कि बैराज में पानी स्टोर नहीं हो सकता. दिल्ली में जिस हिसाब से आबादी बढ़ी, उस तरह से ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं किया गया. इसलिए दिक्कत हो रही है.”

दिल्ली सरकार की कार्रवाई: दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और राज कुमार आनंद ने डूब क्षेत्र वाले अलग-अलग स्थानों पर जाकर सरकारी राहत कार्यों की समीक्षा की। गोपाल राय ने राजघाट स्थित दिल्ली परिवहन निगम डिपो के पास स्थित राहत शिविर का निरीक्षण किया। वहीं मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अक्षरधाम मंदिर के पास एक राहत शिविर पहुंचे. जबकि राजकुमार आनंद ने  शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन के पास बनाए गए शिविर में पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया

दिल्ली में बारिश के पानी की समस्याएं :

  1. जलभराव: दिल्ली में बारिश के समय जलभराव की समस्या होती है। यह सड़कों पर पानी का जमाव उत्पन्न करके यातायात को प्रभावित करता है।
  2. लंबी बारिश की अवधि: कई बार दिल्ली में लंबी बारिश की अवधि होती है, जिससे नदियों, झीलों और बावड़ीयों का स्तर बढ़ जाता है, जिससे जल पुरानी और नयी सुविधाओं की क्षति होती है।
  3. अपर्याप्त नाली सिस्टम: दिल्ली में नाली सिस्टम अपर्याप्त होने के कारण बारिश का पानी निकास नहीं हो पाता है, जिससे रास्ते और इमारतों में जलभराव हो जाता है।
  4. भूजल स्तर की कमी: बारिश के पानी को भूमि में निकालने के लिए उपयोग होने वाले भूजल का स्तर दिल्ली में कम होता जा रहा है। यह समस्या पीने के पानी की उपलब्धता पर भी असर डालती है।
  5. पेयजल संकट: दिल्ली में बारिश के समय विभिन्न इलाकों में पेयजल की कमी हो जाती है। यह स्थानीय लोगों के लिए जीवनीय समस्या बन जाती है।
  6. जल संकट के प्रभाव: बारिश के पानी की अधिकता और निकास की समस्याएं सामान्य जनता के जीवन पर बहुत असर डालती हैं, जैसे अवरुद्ध सार्वजनिक परिवहन, बाजारों में समस्या, और बाढ़ की आशंका।
  7. स्वास्थ्य समस्याएं: बारिश के समय बिमारियों का प्रसार बढ़ जाता है। पानी संक्रमित हो सकता है और संक्रमण, मलेरिया, डेंगू, लीच आदि के कारण रोग प्रसार हो सकता है।
  8. इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षति: बारिश के समय इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे कि सड़कें, पुल, और इमारतें, में क्षति हो सकती है। यह संकट की स्थिति बनाने और सुविधाओं को प्रभावित करने में मदद करता है।
  9. पर्यावरण समस्याएं: बारिश के पानी के अधिकतम प्रवाह द्वारा, धरती को पारितंत्रिक तत्वों, विषाणुओं, और कृषि उत्पादों सहित पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  10. जल संयंत्रों की कम क्षमता: दिल्ली में जल संयंत्रों की कम क्षमता है, जो बारिश के पानी को संचयित और धारण करने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह बाढ़ के समय पानी के स्तर को संभालने में समस्या पैदा करता है।

 

दिल्ली में बारिश की पानी की समस्या में आम नागरिक की उत्तरदायित्व :

1.समय पर विज्ञापन और सतर्कता: नगर पालिका और सरकारी संगठनों को अभियांत्रिकी और मौसम विज्ञान विभाग के साथ सहयोग करके, नागरिकों को समय पर बारिश की सूचना और अलर्ट प्रदान करने की जरूरत होती है।

2. भूमि और जल निगरानी: सुरक्षित और सुरंग निर्माण के माध्यम से, जल का नियंत्रण और निगरानी करने के लिए नगर पालिका और अन्य अधिकारिक संगठनों को जिम्मेदार होना चाहिए।

3. मौसमी पूर्वानुमान और अवधारणा: मौसम के पूर्वानुमान के माध्यम से, संगठनों को उचित स्तर के पानी स्तर और जल विभाजन की अवधारणा करने में मदद मिलती है।

4. नदी और नाले का निर्माण और अवरोध निवारण: शहरी नदी और नालों के निर्माण, निगरानी और सुरक्षा में सुधार करने के लिए नगर पालिका की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

5. भूमि बंदोबस्ती: नगर पालिका को उचित तरीके से भूमि बंदोबस्ती करने और नगर में नलियों, ठेलों और नालों के निर्माण को प्रबंधित करने की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

6. नगर पालिका की जिम्मेदारी: नगर पालिका को बारिश के समय पानी के संचयन, सफाई, और संचालन के लिए जिम्मेदार होना चाहिए।

7. जन संबंधी जागरूकता: नगरिकों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए जन संबंधी जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।

8. जल संरक्षण की अभियांत्रिकी: नगर पालिका को जल संचयन के लिए अभियांत्रिकी समाधानों का विकास करना चाहिए, जैसे कि बारिश के पानी को सुरंगों, तालाबों, और अन्य स्थानों में संचित करना।

9. सावधानी और सुरक्षा: जनता को सावधान रहने और आपदा के समय सुरक्षित रहने के लिए जागरूक करना चाहिए, जैसे कि वाहनों के उपयोग में परहेज रखना और जल प्रवाह से दूर रहना।

10. साझेदारी और सहयोग: सभी स्तरों के सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के बीच साझेदारी बढ़ानी चाहिए, ताकि इस समस्या का समाधान ढीले न चढ़ाएं और नगर की सुरक्षा और सुरंग निर्माण को सुगमता से संभव हो।

 

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