चंद्रयान-3 मिशन का पूरा बजट 615 करोड़ रुपये है। चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान का रोवर चांद की सतह का अध्ययन करेगा और यह लैंडर के अंदर बैठकर जा रहा है। इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2.35 बजे श्रीहरिकोटा से होगी।

चंद्रयान-3: भारत की प्रतिक्रिया चंद्रयान मिशन की अगली कड़ी के लिए

 

नई दिल्ली, 12 जुलाई 2023 – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 मिशन के लॉन्च की तारीख की घोषणा की है। यह मिशन चंद्रयान-2 के बाद भारत की दूसरी चंद्रयान मिशन होगी और इसका उद्देश्य चंद्रमा पर विज्ञान के क्षेत्र में और गहनतापूर्वक अनुसंधान करना है।

अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने गुरुवार को कहा कि इस मिशन के तहत 23 या 24 अगस्त को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास किया जाएगा।

चंद्रयान-3 मिशन भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन के द्वारा भारत अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखता है। चंद्रयान-2 मिशन के अनुसारण करते हुए, चंद्रयान-3 मिशन के लिए नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जाएगा जो चंद्रमा की सतह की और गहनतापूर्वक अनुसंधान करने को संभव बनाएगा।

चंद्रयान-3 मिशन का लॉन्च संघ क्षेत्र के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा। इसरो ने बताया है कि इस मिशन का लॉन्च 2024 के पहले तिमाही में होने की उम्मीद है। चंद्रयान-3 मिशन के लॉन्च के लिए विज्ञापन निगम के माध्यम से संचार साधनों की सौदान की गई है।

चंद्रयान-3 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर अत्यधिक सटीकता के साथ अनुसंधान करना है। यह मिशन चंद्रमा के रचनात्मक प्रकार को समझने, चंद्रमा के उपग्रहों की खोज, तापमान और मौसम के अध्ययन, और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।

चंद्रयान-3 मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस मिशन से भारत अंतरिक्ष अनुसंधान में एक मजबूत पहचान बना सकता है और वैश्विक मानदंडों में अपनी गुणवत्ता को साबित कर सकता है।

 

यह मिशन इतना खास क्यों है?

चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा के तापमान के बारे में पता लगाएगा. यह यह भी पता लगाएगा कि चंद्रमा पर भूकंप कैसे आते हैं। इस मिशन में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का इस्तेमाल किया जाएगा. चंद्रयान-3 में लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल भेजा जाएगा. इसरो अधिकारियों के मुताबिक, ‘लैंडर और रोवर पर लगे उपकरण काफी जानकारी जुटाने में मदद करेंगे।’ लैंडर चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने और रोवर को तैनात करने की क्षमता से लैस होगा, जो चंद्रमा की सतह के बारे में जानकारी भेजेगा।

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